ये 10 फूड सेहत के लिए बहुत हानिकारक है
अच्छे स्वास्थ्य रखने का तरीका: अपने स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने के लिए हम लोगों को अपने खान-पान, रहन-सहन, आचार-विचार में आयुर्वेद को अपनाना ही पडे़गा। जैसे- सुबह-सुबह उठते ही हम लोग चाय को पीते है, कॉफी पी लेते है, तो आयुर्वेद कहता है कि यदि आप सुबह उठकर चाय या कॉफी को पीते हो, तो आपको बीमारी होंगी ही। आयुर्वेद के अनुसार सुबह की शुरूवात पानी से करिए, चाय कॉफी से नहीं। अपने आप ही आप स्वस्थ रहेंगे।
यूरोपीय अंग्रेजी खान-पान। जैसे- पिज्जा, बर्गर, चाऊमीन, हॉट डॉग जैसी बासी चीजों को मत खाइए। इनके तो नाम भी बहुत विचित्र होते हैं। आप अपना भारतीय खान-पान ही खांए। भारत तो ऐसा अद्भुत देश है, जिस दिन आपने जन्म लिया और जिस दिन मरोगे, मतलब जन्म से लेकर मृत्यु तक आप हर दिन एक नयी डिश बनाकर खा सकते हो, इतनी वैरायटी उपलब्ध है, इस देश में।
यूरोप में तो पॉव-भाजी ही मिलती है। वो उनकी मजबूरी होती है। गेहूं की पैदावार तो होती है, वहां। लेकिन उन्हें आटे को गूथना नहीं आता, क्योंकि; वह टेक्नोलॉजी आज तक वो सीख नहीं पाए और हमने शायद ट्रांसफर भी नहीं किया होगा। तो उन्हें आटे को गूथना नहीं आता, बल्कि आटे को सढ़ाना जानते हैं। वह सढ़ाते हैं, उसको। 20 - 20 दिन सढ़ाते है और उस सढ़े हुए आटे से तो पॉव ही बन सकते हैं।
हम तो आटे को गूथना जानते हैं। गूंदे हुए आटे से 48 मिनट के अंदर कुछ भी बना लो। जैसे- पूरी, कचौरी, पराठा। ऐसी बहुत-सी चीजें बन जाती है और उनका सढ़ा हुआ आटा केवल दो ही चीज़ बना सकता है, पॉव रोटी और ड़बल रोटी। लेकिन हम क्यों खाए ये सब सढ़े हुए आटे की रोटी।
यूरोप के लोग सढ़े हुए आटे की रोटी खाते है और फिर उसको पचाने के लिए सढ़ी हुयी कोल्डड्रिंक भी पीते है, क्योंकि; जब कचरा खाएगे, तो पचाएगा भी कचरा ही। लेकिन हमको क्या जरूरत है, ये कचरा पीने की। हम तो गर्म देश में रहते हैं। हमको जरूरत नहीं है और अगर पेप्सी, कोक पीना है, तो बड़ी सोच-समझकर पीजिए, क्योंकि; इसमें वही एसिड होता है, जिससे टॉयलेट क्लीनर बनता है और उतना ही एसिड होता है, जितना टॉयलेट क्लीनर में होता है।
पेप्सी का पीएच 2.4 होता है और फिनाइल का पीएच भी 2.4 होता है, हार्पिक का पीएच भी 2.4 ही होता है। तो इस प्रकार जैसे हार्पिक से टॉयलेट साफ होता है, तो ऐसे पेप्सी से भी होना चाहिए और जब पेप्सी से टॉयलेट साफ किया गया, तो एकदम बिल्कुल साफ-सुथरा सा हो गया और उस पेप्सी, कोक को हम पीते हैं और अकेले नहीं, बल्कि घर में आने वाले मेहमान को भी पिलाते हैं। एक तरफ तो हम कहते हैं, कि अतिथि देवता होता है और देवता को ही संडास साफ करने वाला पानी पिला देते हैं।
अब आपको पता भी होगा, कि पेप्सी, कोक में जहर भी होता है, डीड़ीटी। यह सब पेस्टिसाइड है और जो वैज्ञानिक इस पर रिर्सच करते हैं, वो कहते है, कि यदि आप 7 साल तक पेप्सी को पीते हैं, तो आपकी अन्तड़ियों में कैंसर हो जाएगा। 5 साल तक पिएंगे तो नपुसंकता आ जाएगी। वैज्ञानिक तो यहां तक बोलते हैं, कि एक पेप्सी इंजेक्शन ब्लड़ में लगाओ, तो हृदयघात की भी सम्भावना पैदा हो जाएगी।
कई वैज्ञानिकों ने यह भी सिद्ध किया है, कि यदि गर्भवती मां कोका कोला पी ले, तो गर्भ में बच्चा विकलांग पैदा होगा। आंख में पेप्सी, कोक को डाल लिया, तो आंखों की रोशनी चली जाएगी। इसलिए आप कभी भी पेप्सी, कोक जैसी कोल्डड्रिंक को मत पीजिए। इसके अलावा मौसमी का रस, संतरे का रस, गन्ने का रस, शिकंजी, नारियल का पानी, लस्सी, गाय का दूध और अगर कुछ नहीं मिले तो घड़े का पानी ही पी लो। तो यह सब कुछ जो अमेरिका और यूरोप से आया गया। यह सब हमारी जिंदगी में रहे ये कुछ जरूरी नहीं है। हम लोगों को हमेशा स्वस्थ जीवन के लिए भारतीय खान-पान ही करना चाहिए।
ये 10 फूड सेहत के लिए बहुत हानिकारक है
Reviewed by Chandra Sharma
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September 21, 2020
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