जानिए चाणक्य के अनुसार भगवान कहां रहते हैं?
ऐसा माना जाता है मंदिर वह स्थान है जहां भगवान के दर्शन प्राप्त किए जाते हैं, भगवान को महसूस किया जाता है, देवी-देवताओं की शक्तियां वहां सक्रिय रहती है। इसी वजह से इंसान जीवन में जब भी समस्याओं से घिर जाता है भगवान के घर यानि मंदिर की ओर जाता है। मंदिर जाने के बाद भी कुछ लोगों की समस्याएं कम नहीं होती है। तब वे लोग सोचते हैं मंदिर में भगवान है भी या नहीं।
आचार्य चाणक्य कहते हैं भगवान मूर्तियों या मंदिरों में नहीं है। भगवान हमारी अनुभूति में ही विराजमान है। हमारी आत्मा ही भगवान का मंदिर है। सभी के शरीर में आत्मा रूपी मंदिर में अनुभूति रूपी भगवान विराजित रहते हैं। बस इंसान इन्हें महसूस नहीं कर पाता और दुनियाभर में खोजता रहता है। जबकि भगवान हमारे अंदर ही मौजूद हैं।
चाणक्य के अनुसार भगवान को महसूस करने के लिए आत्मसाक्षात्कार जरूरी है। जो व्यक्ति इस बात को समझ लेता है कि भगवान उसी के अंतर्मन में निवास करते हैं वो सभी दुखों और समस्याओं के प्रभाव से बहुत ऊपर हो जाता है। इसलिए भगवान को मंदिरों में, मूर्तियों में नहीं खोजना चाहिए। हमें अपनी आत्मा में ही भगवान को महसूस करना चाहिए और हमें ऐसे कार्यों से बचना चाहिए जो शास्त्रों द्वारा मना किए गए हैं। तभी भगवान की कृपा हमें तुरंत ही प्राप्त हो जाएगी।
ऐसा माना जाता है मंदिर वह स्थान है जहां भगवान के दर्शन प्राप्त किए जाते हैं, भगवान को महसूस किया जाता है, देवी-देवताओं की शक्तियां वहां सक्रिय रहती है। इसी वजह से इंसान जीवन में जब भी समस्याओं से घिर जाता है भगवान के घर यानि मंदिर की ओर जाता है। मंदिर जाने के बाद भी कुछ लोगों की समस्याएं कम नहीं होती है। तब वे लोग सोचते हैं मंदिर में भगवान है भी या नहीं।
आचार्य चाणक्य कहते हैं भगवान मूर्तियों या मंदिरों में नहीं है। भगवान हमारी अनुभूति में ही विराजमान है। हमारी आत्मा ही भगवान का मंदिर है। सभी के शरीर में आत्मा रूपी मंदिर में अनुभूति रूपी भगवान विराजित रहते हैं। बस इंसान इन्हें महसूस नहीं कर पाता और दुनियाभर में खोजता रहता है। जबकि भगवान हमारे अंदर ही मौजूद हैं।
चाणक्य के अनुसार भगवान को महसूस करने के लिए आत्मसाक्षात्कार जरूरी है। जो व्यक्ति इस बात को समझ लेता है कि भगवान उसी के अंतर्मन में निवास करते हैं वो सभी दुखों और समस्याओं के प्रभाव से बहुत ऊपर हो जाता है। इसलिए भगवान को मंदिरों में, मूर्तियों में नहीं खोजना चाहिए। हमें अपनी आत्मा में ही भगवान को महसूस करना चाहिए और हमें ऐसे कार्यों से बचना चाहिए जो शास्त्रों द्वारा मना किए गए हैं। तभी भगवान की कृपा हमें तुरंत ही प्राप्त हो जाएगी।
चाणक्य नीति - जानिए चाणक्य के अनुसार भगवान कहां रहते हैं?
Reviewed by Naresh Ji
on
February 22, 2022
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